Anilkumar Rathwa (Sameer) 28 Nov 2025 कविताएँ समाजिक “उम्मीद की रोशनी” 14900 0 Hindi :: हिंदी
निराशावादी इंसान तो हर मौके में कमी ही ढूँढ़ता है, जैसे जीवन ने उसके रास्ते में सिर्फ़ मुश्किलें ही बो दी हों। कदम-कदम पर डर, मन में अँधेरा— उसे लगता है कि किस्मत ने उसके लिए बस रुकावटें ही लिखी हों। लेकिन आशावादी इंसान अलग होता है, वह मुश्किलों को भी मुस्कान से अपनाता है, पत्थर में भी राह ढूँढ़ लेता है, और अँधेरे में भी एक नई किरण पा जाता है। जहाँ कोई हार देखता है, वहीं वह सीख ढूँढ़ लेता है; जहाँ कोई रुकावट कहे, वहीं वह नया रास्ता खोज लेता है। निराशावादी को हर दरवाज़ा बंद ही दिखता है, लेकिन आशावादी को उसी दरवाज़े की चाबी मिल जाती है। उसकी सोच में ही नया सवेरा छिपा होता है— और उसका विश्वास हर तूफ़ान को छोटा बना देता है। ज़िंदगी भी अजब सफर है— किसी को राहें काँटों से भरी लगती हैं, किसी को वही राहें मंज़िल की ओर बढ़ते कदम दिखती हैं। फर्क बस नज़र का है, और नज़र ही इंसान का कल तय करती है। कुछ लोग तो मुसीबतों में ठहरकर रोना सीख लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो उसी मुसीबत को अपने सपनों की सीढ़ी बना लेते हैं। हवा चाहे जितनी उलटी बहे, आशावादी के पंख टूटते नहीं— क्योंकि उसका भरोसा उसकी उड़ान से भी बड़ा होता है। इसलिए ज़िंदगी की यही सच्चाई है: सोच बदलो, नज़र बदलो, तो हर मुश्किल भी एक नया मौका बन जाती है। वही आगे बढ़ता है जो अँधेरों में भी उम्मीद की रोशनी ढूँढ़ लेता है।