Rakshi 15 Feb 2025 कविताएँ अन्य 17580 0 Hindi :: हिंदी
टूटे हुए अक्स समेटने मैं चला, अपनी कहानी लिखने मैं चला, अकेले चलने का हुनर है मुझमें, अपने वजूद को समेटते मैं चला, माज़ी की यादों को पीछे छोड़कर, मुस्तकबिल को रोशन करने मैं चला, याराने जो पीछे छूट गए नए रफाक़त बनाने मैं चला, गर्दिशे ज़माने की खाक में मिलाकर, ज़माना ए मुस्तकबिल में सैलाब लाने मैं चला सजेगी फिर से यारों की महफिलें ज़रा ठहरो रौनकें लाने मैं चला।। रुखसार परवीन