अंजली कुमारी 22 May 2024 कविताएँ अन्य तु कर 26840 0 Hindi :: हिंदी
तु डर मत, तु लड़ तु अपने भीतर साहसों को भर। क्यों डरता है कि कल क्या होगा? जो आज मिला उसकी कद्र कर उसे खुशी से कर। यही है तुम्हारे मंजिल का सफर ऊंचा है लक्ष्य तो क्या हुआ? तु अपने हौसले को बुलंद रख। तु कुछ कर, तु कुछ कर लक्ष्य है सामने तु भटकता क्यों है? तु तरसता क्यों है? सपने को छोड़, अब मेहनत के रास्ते चल। तु रुक ना ,तु झुक ना तु जल की धारा सा चल तु सूर्य की तेज है तु चांद की शीतलता, तुझमें ही पूरा आसमान है तुझमें पूरा जहां है। तु कर ,तु कुछ कर।।