Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

दूसरों पर हंसते हो

Rambriksh Bahadurpuri 28 Jun 2025 कविताएँ समाजिक #व्यंग्य #हास्य कविता #रामवृक्ष बहादुरपुरी #अम्बेडकरनगर पोइट्री # 16291 0 Hindi :: हिंदी

दूसरों पर हंसते हो 


कहता हूॅं एक बात,भले जो न अच्छा हो
पर शायद यह बात सोलह आना सच्चा हो
होता है जब सफल कोई बढ़ जाता आगे 
न जानी फिर क्यों निशाना हर कोई साधे
काना फूसी कान कान हर कोई करता 
अरे! गया अब बदल बात कोई न सुनता 
गजब रीति है बनी मनुष्य के अपने मन का
देख सके न सफल होत बढ़ते भी धन का
नजर न आता त्याग तपस्या मेहनत सारा 
कहत फिरै चहुंओर बुराई करते खारा 
पढ़ लिख कर क्या कौन गंवाया कितना होगा?
खुद सोचों धन समय गंवाया उतना होगा!
समय-समय पर कर्ज मर्ज से लदा लगाया
कैसे जीवन वस बिताया अपना होगा 
सफल हुआ यदि नहीं कहीं तो दो कौड़ी का 
हंस हंस कर उपहास उड़ाया कितना होगा 
उल्टा अपने लोग कोसते कब थकते हैं 
कोस कोस कर नर्क भेजते वे रहते हैं 
धन्य है मानव सोंच कहां तक तुम रखते हो 
अपने को न देख दूसरों पर हंसते हो। 

रचनाकार 
रामवृक्ष बहादुरपुरी 
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश 
9721244478

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: