Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri #Rambriksh Bahadurpuri Kavita #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar #Dicember per kavita #ambedkar nagar poetry 32288 0 Hindi :: हिंदी
कविता -क्यों कि मैं दिसम्बर हूं
कपकपाती बर्फीली
साल की अंतिम शर्मीली
ठंड भरी अंबर हूं
क्योंकि मैं दिसंबर हूं।
पड़ते सर्दी का कहर
शाम सुबह कोहरे का पहर
गिरते ओसों का समंदर हूं।
क्योंकि मैं दिसंबर हूं।
सुबह सुहानी पीत धूप की
मधुर मधुर मुस्कान मीत सी
ठंडी की मस्त कलंदर हूं।
क्योंकि मैं दिसंबर हूं।
लंबी लंबी रातें वाला
बीते साल की यादों वाला
जाता बीत कैलेण्डर हूं।
क्योंकि मैं दिसंबर हूं।
मोती से झड़ते ओशो की
बिन बादल के बरसातों की
अजब गजब की मंजर हूं।
क्योंकि मैं दिसंबर हूं।
रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...