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तुम बिन बहुत अधूरा हूं मां

MD SHAYEED ALAM 24 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविता तुम बिन बहुत अधूरा हूं मां 11779 0 Hindi :: हिंदी

तूने हमें जन्म दिया मां, 
हर सुख दिया सारा दुख लिया मां। 
उंगली पकड़ हमें चलना सिखाया, 
रोते हुए को हंसना सिखाया। 
जब बचपन में हम होते बीमार,
तुम हो जाती बहुत परेशान। 
दिन-रात हमारी सेवा करती, 
तुम्हारे नैनों में करुणा ज्योति। 
जब थोड़ी भी चोट लग जाती, 
सारा आसमान तुम सर पर उठाती।
जब रातों को नींद ना आती, 
तुम  जगकर लोरी सुनाती। 
सबको भरपेट खिला, तुम भूखे सोई हो मां, 
जब कभी मैं हुआ बीमार, 
मैं सोया तुम जागी मां। 
जब भी मैं हुआ परेशान, 
तूने हमेशा दिया निदान। 
हमारी खुशी में खुश हो जाती, 
दुख में मेरे आंसू बहाती ‌।
तुम्ही मेरा सब कुछ थी मां,
बिन तेरे मैं अधूरा हूं मां। 
मां क्यों तुम साथ छोड़ गई, 
मुझसे नाता तोड़ गई। 
तुम बिन बहुत तड़पता हूं मां, 
तेरे आंचल को तरसता हूं मां। 
अब रातों को नींद ना आए, 
फिर भी कोई लोरी ना गाए।
हर पल तुझको ढूंढा करता, 
कहीं न मिलता तेरा पता। 
अब भी जब खुशखबरी आती,
तुमको फोन मिलाता हूं मां।
फिर आकर बच्चे बताते, 
नहीं रही अब दादी मां। 
तुम बिन बहुत अधूरा हूं मां, 
तुम बिन बहुत अधूरा हूं मां।।

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