Raju jadaun 20 Dec 2024 कविताएँ दुःखद शांत चुप 20174 0 Hindi :: हिंदी
मेरे घर का एक कोना है। शांत नहीं है कुछ भी इसी बात का तो रोना है।। मैं हूं पागल परिंदा सन्नाटे का जिसको होना है। सनसनाती पवन का एक झोंका आएगा।। पल भर में विखेर के सब कुछ को चला जाएगा । तब तुम्हें खुद से कहना है शांत तुमको बने रहना है।। कहानी का हर एक मोड़ कष्ट हजारों लाएगा । सुनसान राहों का अकेलापन तुझको भाएगा।। अर्धरात्रि का वह काला पहर तुम्हें बीते कल की याद दिलाएगा। तब तुम्हें खुद से कहना है....... वह चंचल मन फिर तुम्हें इस अंधेरे में लाएगा ।। तुम्हें तुम्हारे पथ गमन से भटकाएगा। तब तुम्हें खुद से कहना है..... आहिस्ता-आहिस्ता मन रूपी दानव थक जाएगा।। तुम्हे तुम्हारा स्वर्णिम भविष्य फिर से दिखलाएगा।