Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक सामाजिक 53597 0 Hindi :: हिंदी
//...सुप्रभात...//
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जीवन है
एक वीणा
सुख-दुख
इसके तार...!
इन दो
पहलू के ,
भंवर जाल
के बंधन में,
उलझा है ,
सारा संसार...!
इसलिए,
अपनी और
दूसरों की
बजाते रहो...!
दूसरों को ,
हंसाओ और
खुद हमेशा ,
मुस्कुराते रहो...!
रोज का दिन ,
सब प्राणियों का,
मंगलमय हो...!
हम चले सभी ,
प्रेम ,शांति और
नेकी की राह पर..
हम सब की सदा ही,
जय हो विजय हो...!
चिन्ता नेताम ' मन '
डोंगरगांव (छत्तीसगढ़)