Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

स्त्री

Vishakha Sharma 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य #Vishlekh2314# 67709 1 5 Hindi :: हिंदी

टूटना क्या होता है,
ये उससे पूछो,
जो घर की चार दीवारो तक ही सिमट जाती है।
उड़ान उसे भी भरनी थी,
लेकिन वो परिवार, बच्चे, घर,
इनमें ही उलझ कर रह जाती है।
मुस्कुराती है वो सबके साथ में,
मुस्कुराती है वो सबके साथ में,
लेकिन अकेले में आंखें उसकी भी भर आती है।
ख्वाब तो उसने भी देखे थे बड़े-बड़े,
लेकिन जिम्मेदारियों के दबाव से,
उन्हें वह धुंधला कर जाती हैं।
आशाएं बहुत थी उसे अपनों के अपनेपन से,
लेकिन वो अपनों के रूखे-सूखे व्यवहार,
के कारण पराएपन से जुड़ जाती है।
वो सब सहन कर जाती है,
वो सब सहन कर जाती है,
यूं ही नहीं वो स्त्री कहलाती है।

Comments & Reviews

Vishakha Sharma
Vishakha Sharma 😊

3 years ago

LikeReply

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: