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स्त्री

Rambriksh Bahadurpuri 01 Dec 2024 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri #Ambedkarnagar poetry #Stri per kavita 22438 0 Hindi :: हिंदी

स्त्री 

नदियों के जल सी तुम 
"मीठी"
बंधी किनारों के दायरे में 
"बहती"
उथल-पुथल गहराई सहती
"रहती"
कल कल की गीतों को गाती 
"चलती"
सफ़र सुहाना खुद से ही तय 
"करती"
सदा संवरकर बन कर ठन कर 
निधि के बांहों में खुद,आत्मसमर्पित 
"गिरती"

रचनाकार 
रामवृक्ष बहादुरपुरी 
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश

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