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सोचते सोचते

RANJIT MAHATO 28 Dec 2024 कविताएँ अन्य सोचते सोचते #hindi poem #hindi poetry #hindi kavita #सोचते सोचते,समय,आत्म मंथन ,गलत धारणा,हिंदी काव्य ,हिंदी कविता ,ranjit mahato,रंजीत महतो 20259 0 Hindi :: हिंदी

सोचते सोचते, 
समय निकल गया,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

गलत धारणा को दुर भागने में,
समय निकल गया,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

काल्पनिक दुनिया से बाहर आने में,
समय निकल गया,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

अपने हुनर हो व्यर्थ आजमाने में,
समय निकल गया,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

व्यर्थ की चीज़ को दिव्य ज्ञान समझकर, 
उसे पाने में,
समय निकल गया ,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

सुविचारों को अपनाने के लिए, 
सही समय की इंतज़ार में, 
समय निकल गया ,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?

खुद को बड़ा दिखने मे,
समय निकल गया ,
अब सोचता हुँ क्या करुँ ?


संतुष्टि है इस बात की, 
जो समय बच गया है, 
उसे सोचने में न गावउँ, 
जीवन को सार्थक बनाऊँ I

					                                                                                                                  Ranjit Mahato

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