Kranti Raj 30 Mar 2023 कविताएँ हास्य-व्यंग 150 51257 0 Hindi :: हिंदी
समय की चक्र समझो यारो ,
होना मत कमजोर !
प्यार की हवा में बह जाना
समझो वो कदर जानो यारो ,
कीमत हर पल की मानो
जहुरी वो ही जाने यारो !
ईस्वर के दरवार मे हजारी लगा लो
सीस झुकाकर किमत पहचानो ,
सुख दुख की राह मे समय की है,पहचान
रेत की महलो वालो थोडा अपने सम्भालो !
सैतानो की पैदानो आजकल महल बनाते है
समय की चक्र मे इंसान ही पिसाते है,
कमजोरी समझो कमजोर को
जो सोते बीना छत के
किमत उसे भी जानो यारो !
समय की चक्र समझो यारो,
होना मत कमजोर !
क्रान्तिराज बिहारी