Yogesh Yadav 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 103666 0 Hindi :: हिंदी
वो मेरे स्कूल का पहला दिन था बारिश हो रही थी और स्कूल बस दरवाज़े पर खड़ी थी मेरी ज़िद थी की मुझे नहीं जाना और न जाने क्यों माँ ज़बरन भेजने पे अड़ी थी मुझे याद है, बहुत रोया था जब बस पे बैठे जा रहा था पाठशाला भारी सा एक बस्ता था और हाथ में छाता गीला वाला अनजान से वो लोग थे सारे अनजानी सारी बातें थी अच्छा लगता सफर, अगर मुझे पता होता की वो मेरी ज़िन्दगी की पहली solo trip होने वाली थी फिर as a boy आखरी बार feel हुआ of having an advantage जब teachers मुझे छोड़ पुराने बच्चो को डांटते रोते हुए गया था, हस्ता हुआ वापिस आया क्युकी notebook थोड़ी भरी हुई, और जेब में 4 यार थे