संदीप कुमार सिंह 24 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित मे है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 24044 6 5 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) शिक्षा के सम्मान से, जगत बनें गुलफाम। करें देश को सबल सब, होत जगत में नाम।। शिक्षा का सम्मान से, मानव करे विकास। खुशियों में जीवन कटे, प्रभु पर हो विश्वास।। शिक्षा का सम्मान हो,सबको हो यह ध्यान। घर घर शिक्षित तब बने, हो उन्नत विज्ञान।। शिक्षा का सम्मान ही,शुद्ध श्रेष्ठ कर्तव्य। गमके भारत देश जब, जन जन हो तब सभ्य।। शिक्षा का सम्मान यूं, कर जैसे आहार। धरा स्वर्ग सा तब लगे,जीवन सजे बहार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
2 years ago
2 years ago
2 years ago
2 years ago
2 years ago
2 years ago
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....