Anilkumar Rathwa (Sameer) 24 Aug 2025 कविताएँ धार्मिक श्रीमद् भगवद् गीता – आज के समय में 26391 0 Hindi :: हिंदी
जब जीवन भाग-दौड़ से थक जाता है, मन भ्रम और चिंता में उलझ जाता है, तब कृष्ण की वाणी फिर याद दिलाती है— "कर्तव्य करो, बस कर्म निभाते जाओ।" नौकरी, व्यापार, रिश्तों के रण में, हर कोई खड़ा है अपने भ्रम में, पर गीता सिखाती है संतुलन का राज़— "सफलता- असफलता में मत फँस जाओ।" आज की गीता है आत्मविश्वास का दीपक, जो अंधकार में जलती ज्योति समान है, ये बताती है— मनुष्य शरीर नहीं, आत्मा है, जो सदा अजर-अमर और महान है। गीता आज भी हमें समझाती है, लोभ और क्रोध से बचाती है, सच्चाई, धर्म और कर्तव्य का मार्ग— हर युग में यही राह दिखाती है।