Sunny Kumar 07 Aug 2024 कविताएँ समाजिक 33785 0 Hindi :: हिंदी
वर्षा बरस रही है झम-झम बिजली चमक रही है चम-चम बादल घुमड़-घुमड़ कर आए सावन का एहसास दिलाए टर-टर-टर, मेढ़क टर्राए इधर-उधर फुदकता जाए झिंगुर शाम में झूँ- झूँ गाए जुगनू रातों को सजाए लगा धान का पौधा खेतों में देख-देख भूधर हर्षाए फसल अबकी होगी अच्छी सोंच-सोंच फूले न समाए चारों तरफ हरी भरी धरा पर हवा की झोंके कंघी कर जाए तरह-तरह की पत्तियों वाली पेड़-पौधे खिल-खिल इठलाए गांवों की पीपल के नीचे में झूलों की पेंग बढ़ाई जाए मधुर-मधुर स्वर गलियों में कोई कजरी गीत गुनगुनाए वर्षा ऋतु की अनुपम माह सावन सभी के मन भाए जलचर,थलचर और नभचर का जन-जीवन पावन कर जाए