akhilesh Shrivastava 27 Aug 2024 कविताएँ समाजिक आजकल नई पीढ़ी का पश्चिमी सभ्यता संस्कार एवं भाषा के प्रति बढ़ता झुकाव चिंतनीय है 38812 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
* संस्कृति में बदलाव *
पिता ,पापा और डेड से
हो गये हैं अब पाप्स
मां ,माता और मम्मी से
हो गई हैं अब मोम।
पश्चिमी शब्दों के चलन का
बढ़ गया है संचार
नई पीढ़ी इन शब्दों का
कर रही स्वयं प्रचार।
भैय्या, भाई से ब्रो हुए
बहिन सिस कहलाएं
सभी उम्र के लोग अब
अंकल आंटी कहलाएं ।
कुटुंब परिवार के सदस्य
सब कजिन में गये समाय
आपस के रिश्ते सभी
रिलेटिव कहलाएं।
रिश्ते नेगेटिव हुए
पाज़िटिव हैं दोस्त
आपस के सम्बंधों में
प्रेक्टिकल हो गये लोग ।
बड़ों का कोई आदर नहीं
करते नहीं प्रणाम
हैलो शब्द सबसे कहें
गुड मार्निंग पर विश्राम
संस्कृति और संस्कारों का
नहीं रहा कोई मोल
हिंदी में नहीं बोलते
बोलें अंग्रेजी बोल।
आधुनिकता की दौड़ में
भ्रमित हैं नये पेरेंट्स
नई पीढ़ी की सोच पर
अब क्या करें कमेंट्स।
रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...