Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 कविताएँ धार्मिक #राम राज्य#सारा जग प्रेरणा# हिंदुत्व 47836 0 Hindi :: हिंदी
सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ राम हैं
भाव सूचियां बहुत हैं भाव सिर्फ राम हैं
कामनाएँ त्याग पुण्य काम की तलाश में
राजपाठ त्याग पुण्य काम की तलाश में
तीर्थ खुद भटक रहे हैं धाम की तलाश में
न तो दाम न किसी ही नाम की तलाश में
राम वन गए थे अपने राम की तलाश में
ढाल में ढले , समय की शस्त्र में ढले सदा
सूर्य थे मगर वो सरल दीप से जले सदा
ताप में तपे स्वयं ही स्वर्ण से गले सदा
राम ऐसा पथ है जिसपे राम ही चले सदा
दुख में भी अभाव का अभाव सिर्फ राम हैं।
भाव सूचियां बहुत हैं भाव सिर्फ राम हैं।
ऋण थे जो मनुष्यता के वो उतारते रहे
जन को तारते रहे तो मन को मारते रहे
इक भरी सदी का दोष खुद पर धारते रहे
जानकी तो जीत गई राम हारते रहे
सारे दुख कहानियां हैं दुख की सब कहानियां
हैं घाव सिर्फ राम हैं
सब के अपने दुख थे सारे दुख छले गए
वो जो आस दे गए थे वही साँस ले गए
कि रामराज की ही आस में दिये जले गए
रामराज आ गया तो राम ही चले गए
हर घड़ी नया नया स्वभाव सिर्फ़ राम हैं
भाव सूचियां बहुत हैं भाव सिर्फ राम हैं
जग की सब पहेलियों का दे के कैसा हल गए
लोग के जो प्रश्न थे शोक में बदल गए
सिद्ध कुछ हुआ न दोष, दोष सारे टल गए
सीता आग में न जली, राम जल में जल गए
---- पंडित विशाल मिश्र