Anilkumar Rathwa (Sameer) 04 Sep 2025 कविताएँ अन्य " सफलता और मेहनत " 12486 0 Hindi :: हिंदी
सफलता न रूप की भूखी है, न ही किसी वंश की दासी है। वह तो केवल पसीने की दीवानी, मेहनत की सच्ची प्यासी है। चेहरे की चमक कब तक रहेगी, समय तो सबको आज़माएगा। पर जिसने कर्म किया निरंतर, वही शिखर तक पहुँच पाएगा। सपनों से मंज़िल नहीं मिलती, उनके लिए तपना पड़ता है। हर ठोकर को सीढ़ी बनाकर, आगे बढ़ना पड़ता है। सफलता किसी को यूँ ही नहीं मिलती, यह तो त्याग और तपस्या माँगती है। जो दिन-रात कर्म के दीप जलाए, वही जीवन की ज्योति संग लाती है।