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सच्चे मित्र

अंजली कुमारी 03 Jun 2024 कविताएँ समाजिक सच्चे मित्र 46589 0 Hindi :: हिंदी

मित्रता बड़ा अनमोल रतन है,
इसमें खत्म सारा चिंतन है।
पास न आए कोई दुख-दर्द,
इसे सहने वाले मेरे मित्र हैं।

जब मैं भटक गई  कुमार्ग पर,
तब मेरे मित्र ने लाया मुझे सुमार्ग पर।
यह रिश्ता भी कितना अनोखा,
जिसमें अंत का न कोई रेखा।

इस रिश्ते का कोई मोल नहीं,
जिसमें कोई तौल नहीं।
ऊंच-नीच से घृणा नहीं,
आपस में हमें प्रेम है।

हार गई जब मैं अपने लक्ष्य से,
आशा की किरण जगाई थी।
डटकर सामना करने की,
उत्साह उसने बधाई थी।।

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