Amarnath Yatra 01 Dec 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत कविता सच्चा प्यार झुठी चाहत , धोखा, चाहत, प्यार मोहब्बत, 7773 0 Hindi :: हिंदी
मैंने सपनों की छोटी सी गली में, तेरे नाम का दिया जलाया,
सोचा था सात फेरे ले कर, तुझे अपने घर ले जाऊँगा।
मन में था सीधा‑सादा सपना, तेरा हाथ पकड़ कर चलूँ,
पर तू तो बस वहीं तक साथ थी, जहाँ तक चमक और पैसा दिखा।
तू मुझे शहर की बड़ी दुकान लगी, बाहर से बहुत चमकदार,
मैं था बस सच्चाई का छोटा ठेला, थोड़ा साधारण, थोड़ा बेकार।
जब तूने पूछा, “तू क्या दे सकता है?”, मैंने कहा, “दिल और मेहनत”,
तू बोली, “ये सब नहीं चलता, यहाँ चाहिए जेब में चकाचक दौलत।”
तेरी हँसी थी जैसे टीवी का विज्ञापन, ऊपर‑ऊपर से बहुत मीठी,
मेरी आँखों में आँसू सच्चे थे, पर तूने समझी नहीं वो प्रीत।
मेरे पास भरोसे की पूँजी थी, इज़्ज़त और साफ़ नीयत का धन,
तू छोड़ गई मुझे अकेला, और पकड़ लिया झूठ का दामन।
अब न कोई सौदा होगा, न प्यार की नीलामी होगी,
जिसे साथ चलना होगा, उसके दिल में भी सच्चाई होगी।
न कपड़ों की कीमत देखूँगा, न गहनों का तौल करूँगा,
बस इतना देखूँगा, मुसीबत में क्या वो सचमुच मेरा साथ देगी।
जो लालच के पीछे भाग गया, उसे खुश रहने की दुआ दे दी,
टूटा दिल थोड़ा रोया ज़रूर, पर फिर खुद से नई शुरुआत ले ली।
जब भी शादी करूँगा आगे, वो लड़की होगी दिल से साफ़,
जिसके लिए इंसान की क़ीमत पहले, और पैसा बस हो थोड़ा‑सा ख्वाब।
Wirte by- Amarnath Yatra