Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

सबरी के राम

कवि राजवीर सिकरवार 30 Mar 2023 कविताएँ धार्मिक 71062 0 Hindi :: हिंदी

कवित्त रामायण- (अरण्य काण्ड समाप्त )
"""""""""""""""""""""""""""""""'''''''''''''''''''''''''’''''''''''''''
प्रसंग- भगवान राम माता सबरी से जानकी के वारे में पूछते हैं,तब सबरी का जवाब-
          ( आपके सुझाव स्वागतेय )
                 ----------------------
बोली -भीलनी कि सर्वज्ञ हो कृपानिधान,
          पूछते तथापि, है कहाँ विदेहनंदिनी ?

लोकाचार मान के जो पूछते दयानिधान,
     तो सुनो ! बताती हूँ, जहाँ विदेहनंदिनी ।

लंकापति जानकी को ले गया चुरा के लंक,
        बैठी है विदेह -सी, वहाँ विदेहनंदिनी ।

जानकी के प्राण करें आपके ह्रदय में वास,
         प्रेम से निवासती, तहाँ विदेहनंदिनी ।
                         _________

आगे ऋष्यमूक नाम शैल है विशाल एक,
         पास में है पम्पासर तीर चले जाइए ।

कूल पे खिले हुए सुगंधयुक्त लाखों पुष्प,
            मंद-मंद बहती समीर चले जाइए ।

बालि के प्रकोप से सताया मंत्रियों के साथ,
        नाथ ! सूर्यग्रीव है अधीर चले जाइए ।

"भारती" से होगी वहाँ मित्रता तिहारी नाथ,
            मेंटने को पीर रघुवीर चले जाइए ।
                   ------------------

बार-बार भीलनी ने राम को किया प्रणाम,
      योगअग्नि में शरीर जार के चली गई ।

आभूषण भव्य और तेज सूर्य के समान,
        दिव्य दूसरा शरीर धार के चली गई ।

भक्ति मनों शक्ति जैसे कोंध बीजुरी समान,
        देह प्रभु राम पे निसार के चली गई ।

"भारती" बसाके हिय राम को श्रीधाम लोक,
        राम-नाम अंत में उचार के चली गई ।
                  _______________

त्यागि कें अरण्य घोर, दोनों वीर पम्पा ओर,
     नारि कौ अशीष शीष धारि कें चले गए ।

आगे रघुवीर जात पाछें शेष धीर-वीर,
        आश्रम मतंग कौ जुहारि कें चले गए ।

इष्ट को अराधि बांधि कें कटार कांधे बीच,
     तीर औ कमान को सम्हारि कें चले गए ।

"भारती" भरोसो मोहि तारेंगे जरूर जब,
     भीलनी को राम जी उवारि कें चले गए ।
_________________________________
कवि राजवीर सिकरवार 
सबलगढ़ मुरैना म.प्र.

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: