Bholenath sharma 18 Nov 2024 कविताएँ समाजिक सबको हँसाते रहो 83744 0 Hindi :: हिंदी
जो सबको हँसाते फिर रहें जरा, उनसे भी पूछो कितना रोये हो l वो गमों का दौर था, गुजर चुका है अब हंसो, और सबको हंसाते रहो ।
Login to post a comment!
...