संदीप कुमार सिंह 21 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 25992 0 Hindi :: हिंदी
रिश्ता तो रिश्ता होता है फिर खुशी होते, जिससे अपना दिल लगा वही अपने होते, फिर पराए भी खासम खास हो जाते हैं_ जिंदगी में फिर फूलों की खुशबू ही हैं भरते। रिश्ते को सम्हाले रखना ही बहुत बड़ी बात है, नहीं तो उदासियों का ही फिर रहता सौगात है, रिश्ते जीवन में सुरभित गुलशन जैसा है होता_ रिश्ते से ही धरा पर रंगीनियां बना रहता है। कुछ मैं सुन लूं_कुछ आप सुन लो जनाब, शिकवे गीले को भूल जाइए गले मिलो जनाब, ज़िंदगी की राहों से मत घबराइए मेरे प्रिय जनों_ हर गम को आपस में बांटकर चलें जनाब। छोटी_छोटी बातों पर हो जाती है तकरार, इन तकरारों से उबरकर फिर से कर लें प्यार, प्यार ही तो जगत के अनुपम अटल आधार_ एक_दूसरे का करते रहिए जिंदादिल आभार। कभी_कभी हमलोग बिछड़ भी जाते हैं, क्योंकि ज़िंदगी के रंग_ढंग को निभाने हैं, ऐसे में अपने यादों के सहारे दिल में आते_ फिर मिलने के बहाने हम सभी बनाते हैं। हस_खेलकर ही तो जिन्दगी जिया जाता, परायों को भी अवश्य अपना बनाया जाता, खाली हाथ आए हैं और खाली ही जायेंगें, इसलिए मधुर बोलियों से जग लुभाया जाता। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....