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"रुकना नहीं, झुकना नहीं"

Anilkumar Rathwa (Sameer) 18 Aug 2025 कविताएँ अन्य "रुकना नहीं, झुकना नहीं" 24565 1 4 Hindi :: हिंदी

किसी की बातों में मत उलझना,
उनकी सोच को मत अपनाना।
तेरी मंज़िल तेरा सपना है,
उसे पाने को बस बढ़ते जाना।

समय अनमोल है — यूँ ही न गँवाना,
हर पल को रत्न की तरह सजाना।
अगर कुछ करना है,
तो आज ही कर डालो,
कल का भरोसा छोड़ो,
खुद पर विश्वास संभालो।

मत डरना तू राह की ठोकर से,
मत झुकना तू लोगों के शोर से।
जोश जगा लो अपने सीने में,
आंधी से भिड़ो अपने ज़ोर से।

एक दिन सवेरा तेरे हक़ में होगा,
तेरी मेहनत का सूरज उगेगा।
कदम-कदम पर तेरी जीत लिखेगा,
तेरा नाम जमाना पुकारेगा।

हिम्मत को साथी, कर्म को हथियार बना,
सपनों की खातिर अब खुद को तैयार बना।
थाम ले विश्वास, मत पीछे मुड़ना,
अब तुझे चलना है, बस मंज़िल तक बढ़ना।

Comments & Reviews

Alok ks
Alok ks वाह उम्दा रचना🙏🏿 कृपया मेरा भी रचना पढ़ें और प्रतिक्रिया दें।

9 months ago

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