Laxmi nishad 26 Jul 2024 कविताएँ अन्य प्रकृति का संदेश 38245 0 Hindi :: हिंदी
पर्वत कहता शीश उठाकर , तुम भी ऊँचे बन जाओ । सागर कहता हैं लहराकर , मन में गहराई लाओ । समझ रहे हो क्या कहती हैं, उठ - उठ गिर - गिर तरल तरंग । भर लो ,भर लो , अपने मन में , मीठी - मीठी मृदुल उमंग । पृथ्वी कहती , धैर्य न छोड़ों , कितना ही हो सिर पर भार । नभ कहता हैं ,फैलों इतना , ढक लो तुम सारा संसार ।