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प्रकृति एक रंग अनेक ।

Jeevan kumar 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम जीवन एक साहित्य 109773 0 Hindi :: हिंदी

      प्रकृति एक रंग अनेक
 प्रकृति तेरे रंग अनेक,
कहीं मग्न जल,कहीं धूप रंग,
 कभी तू अपने रंग निखारे,
टप - टप कर तू जल बरसाए,
 तेरी धरा में हम है बैठे,
रंग तुझसे,हम है समेठे।

बूंद - बूंद तेरी, लहराए गाना,
 तुझसे सीखे नियम बनाना,
उज्ज्वल उपवन हवा है बहती,
 सुंदरता का रंग संजोती ।

नदिया नाले उफान पर आते,
 आमजन अभी कुछ न कर पाते,
उधर गया वो, इधर न आया,
 इधर - उधर वो न कर पाया ।

कहीं किसी को धूप है चुभती,
 कहीं किसी को पानी न सहाय,
जल - जीवन सौंदर्य यही नियम तेरे है,
है मातृभूमि रंग तेरे सुनहरे है ।
                                        (जीवन)


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