akhilesh Shrivastava 21 Sep 2024 कविताएँ समाजिक हमारे पूर्वज पितृपक्ष में हमसे मात्र सम्मान और प्यार पाने आते हैं बदले में हमें ढेरों आशीष देकर विदा हो जाते हैं। 29616 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
*पितरों का सम्मान करें*
पन्द्रह दिन के पितृपक्ष में
पितर हमारे आते हैं
देख हमें सम्पन्न सुखी
वे वापस हो जाते हैं।।
श्रद्धा से हम श्राद्ध करें
यही आस वो करते हैं
विधिवत श्राद्ध कर्म करके
हम उनका सम्मान करें ।।
मात -पिता की सेवा करना
ही कर्तव्य हमारा है
उनकी छत्रछाया में ही
जीवन सुखी हमारा है।।
माता पिता के त्याग का कर्जा
चुका नहीं हम सकते है
उनके आशीर्वाद से ही हम
जीवन में सफल हो सकते हैं।।
श्रद्धा प्यार हमारा पाकर
पितर प्रसन्न हो जाते हैं
देकर हमें आशीष पितर
खाली हाथ बिदा हो जाते हैं।।
रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जय नगर जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...