अंजली कुमारी 20 May 2024 कविताएँ समाजिक पिता 30103 0 Hindi :: हिंदी
पिता,मेरे खुशियों का आंगन है तू, मेरे हर सपने का दर्पण है तू। तुझसे ही होता मेरे सारे ख्वाहिश साकार, तुम्ही बनाते मेरे जीवन का आकार। पिता,मेरे विद्या का आश्रम है तू, मेरे जीवन का मार्गदर्शन है तू। तुझसे ही सीखा मुश्किलों में भी हंसना, तुम ही हो मेरे चेहरे की मुस्कान। पिता, मेरे सफलता का कारण है तू, मेरे हर खुशी का साधन है तू। तुझसे ही होता हर दुखों का समाधान, तुम ही हो मेरे दुनिया जहान। पिता, मेरे ज्ञान का भंडार है तू, मेरे हौसले का उड़ान है तू। तुझसे ही मिला संघर्ष करने का अधिकार, तुम्ही हो मेरे शिक्षा का आधार। पिता, मेरे अन्न,जल का सागर है तू, मेरे बचपन का सवारी है तू। तुझसे ही मिला मेहनत का वरदान, तुम ही हो मेरे पुण्यों का परिणाम।।