akhilesh Shrivastava 23 May 2024 कविताएँ समाजिक आजकल एकल परिवार का प्रचलन बढ़ रहा है जिसके कारण समाज में हिन्दू संस्कार प्रेम प्यार कम हो रहा है 31472 0 Hindi :: हिंदी
*परिवार* परिवार अब एकल हो रहे हैं घर कब मकान हो रहे हैं। दादा दादी अब खो रहे हैं नाना नानी किस्से हो रहे हैं।। मामा मौसी अब नहीं जानते चाचा -चाची को नहीं पहचानते। भाई बहिन के रिश्ते सो रहे हैं अहंकार में ये डूब रहे हैं। रिश्ते तो अब गुमनाम हो रहे हैं संयुक्त परिवार अब लुप्त हो रहे हैं। रिश्ते तो अब फार्मल हो रहे हैं फ्रेंड्स अब फेमिली हो रहे हैं।। पराये अब अपने हो रहे हैं अपनों से मतभेद बढ़ रहे हैं। पारिवारिक रिश्ते खत्म हो रहे हैं प्रेम प्यार के बंधन टूट रहे हैं।। समाज के चलन बदल रहे हैं परिवार अब *एकल* चल रहे हैं। *परिवार* अब कल्पना हो गए हैं हिन्दी का एक *शब्द हो गए हैं रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...