अंजली कुमारी 22 Jun 2024 कविताएँ दुःखद पक्षी की चाह 29407 0 Hindi :: हिंदी
पिंजरे में मुझे रखते हो बंद क्या मेरी कोई चाह नहीं? मेरे भी कई सपने है मेरे भी कई अरमान है। मुझे भी उड़ना नीले नभ में मुझे भी पीना नदियों का जल, मुझे भी गाना सुरीले गान क्यूं नहीं उड़ने देते तुम इंसान। थक गई हूं इस कैद में भूल गई हूं अपनी उड़ान, छूट गया मुझसे मेरा परिवार तुम लौटा दो मुझे मेरा संसार। अहित न चाहती मैं तुम्हारा तुम्हारी मदद की मुझे चाह नहीं, अन्न,जल न दो तुम मुझे फिर भी मैं संतोष कर लेती। प्रदूषण फैलाकर तुम वायु को दूषित कर देते, यही तो है सहारा मेरा इसे भी तुम मुझसे छीन लेते। मुझे भी जी लेने दो जिंदगी सीख लेने दो जीने के रास्ते, क्योंकि मेरे भी कई सपने हैं मेरे भी कई अरमान है।।