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पढ़ी लिखी नारी

Rakshi 15 Feb 2025 कविताएँ समाजिक 20418 0 Hindi :: हिंदी

पढ़ी- लिखी नारी
हम है पढ़ी - लिखी नारी,
हम पर है कुछ जिम्मेदारी
अन्याय को सहने की
 अब नहीं है अपनी बारी,
इंसाफ के लिए लड़ने 
अब की है पूरी तैयारी

हर नारी सशक्त हो 
हर नारी हो सबला 
बराबरी का हक मिले चाहे
नर हो या नारी
हर फ़र्ज़ निभाया हमने
 मां पत्नी या गुरु
बात करते है हम बराबरी की
इसमें क्या है दुश्वारी



रुखसार परवीन

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