Ajeet 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद 44991 0 Hindi :: हिंदी
कर निर्माण नीड़ो का
और कहीं/
पतझड़ का मोसम
जो बीत गया,
पत्तों का रंग
तो सूख गया,
अंधेरों का कल में
सोर नहीं,
कर निर्माण नीड़ो का
और कहीं/
घेर रहा है
आंधियों का घेरा,
धरा पे फैल गया
इसका डेरा,
मचा है बादलो का
सोर यहीं,
लगा उड़ने का
ज़ोर कहीं,
कर निर्माण नीड़ो का
और कहीं/
लेखक - अजीत