संदीप कुमार सिंह 15 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत खत जवाबी, खत आँखों में, आज सुबह, प्रभात, खुशबू , वातावरण, सुरभित,आनंद, अहसास, नया, लब, अदा, फासला 39734 0 Hindi :: हिंदी
आज सुबह जब मैं नींद से जगा और सामने देखा, प्रभात की खुशबू से वातावरण सुरभित था। बड़ा मन ही मन आनंद का अहसास हो रहा था, और लग रहा था की आज कुछ नया ही होगा। हां मैं भी लबों पर एक अनजान नगमा रखा, और जोर_जोर से गाने लगा। फिर निकल चला सैर करने के लिए, एक जानी पहचानी चेहरा सामने आई। नजर ने नजर से मुलाकात करी, हम चुप थे नजर नजर को पढ़ रही थी। फिर अचानक से मेरे लब खुले, और शब्द निकला आप बहुत खूबसूरत हो। बस वह बावली नजरों से देख रही थी, मैं भी बावला सा उसके नजरों को ही देख रहा था। एक_दूसरे से जो फासला था, आज बड़ी अदाओं से खत्म हो गया। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....