Vipin Bansal 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य #नजरभीआए 69256 0 Hindi :: हिंदी
अपनी आँखों से गर देखो !
तो कुछ नजर भी आए !!
पड़े पर्दे गर हटाओ !
तो कुछ नजर भी आए !!
तीरगी काजल जो लगाया !
मेरे दुश्मनो ने तेरी आँखों में !!
गर ढंग से पोंछ लो !
तो कुछ नजर भी आए !!
सत्य हमेशा ढाप दिया !
गर्दा ए चापलूसी डाल दिया !!
चमचो के चम्मच छोड़ो !
तो कुछ स्वाद भी आए !!
चापलूसी की चासनी !
जुबां पे इसका स्वाद !!
चमचा ए रोग लगा !
कैसे बनेगी बात !!
सत्य की चख लो कटुक निबौरी !
तो यह रोग भी जाए !!
सुनो सबकी करो अपनी !
गर छान लो हर बात !!
सुन सको मन की बात !
तो कुछ समझ भी आए !!
जुबां दूसरो की !
अब तक बोलते आए !!
गर बोलो अपने बोल !
तो कुछ मिठास भी आए !!
जमाने में दोष ढूँढने वालो !
नजर खुद पर भी तुम डालो !!
रख लो आइना अपने पास !
तो कुछ तस्वीर भी साफ हो जाए !!
अपनी भूले तुम चाल !
अब तक चले दूसरो की चाल !!
गर चलो अपनी चाल !
तो कुछ लचक भी आए !!
अपनी आँखो से गर देखो !
तो कुछ नजर भी आए हैं !!
विपिन बंसल