नितिश सरोज पाण्डेय 11 Feb 2025 कविताएँ समाजिक 16059 0 Hindi :: हिंदी
हे प्रथम वंदना की प्रतीक हे शक्तिरूप हे दयारूप हे ज्ञानरूप हे प्रेमरूप हे दिव्यरूप हे विश्वरूप तुम शक्तिरूप में आती हो तो दुर्गा बन जाती हो वीणा के वादन के संग तुम सरस्वती बन जाती हो मातृरूप में परिवर्तित हो प्रेम और ममता बरसाती हो हे नारी तुम सृष्टि हो शीतल हो, अग्नि की हो मशाल तुम कण कण में व्यापक समग्र अस्तित्व तुम्हारा बहुत विशाल हे जीवनदायिनी नारी इस पृथा पर तुम इश्वर हो इस नश्वर सम्पूर्ण जगत में तुम ही महज अनश्वर हो