Bholenath sharma 06 Jul 2023 कविताएँ समाजिक 55755 0 Hindi :: हिंदी
नारी तुम सकल विश्व की शक्ति हो मत समझो तुम खुद को अक्षम हो । असीम बसे तुझमें ही गुण है। तुम ही जननी हो तुम ही पौरूष की शक्ति हो ।
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