Ujjwal Kumar 14 Jun 2023 कविताएँ समाजिक 31283 1 5 Hindi :: हिंदी
नारी सृजन का आधार है, नारी से ही जीवन साकार है, नारी समर्पण की अद्भुत मूर्त है, हर रूप में कर्तव्य स्वरूप है, मां, बेटी, बहू,भाभी, बहन हर रिश्ता उसने निभाया है, जिस सम्मान की हकदार वो आखिर क्यों उसे नहीं मिल पाया है? जीवनदायिनी है नारी तो आखिर क्यों धर्म आडंबरों ने नारी का जीवन नरक बनाया है? सबला है नारी तो आखिर क्यों परिस्थितियों में उसे अबला दर्शाया है? प्रेम निष्ठा समर्पण विनम्रता के भाव का मिश्रण है नारी, आखिर क्यों उसने अपने जज्बातों को छिपाया है? हर रिश्ता निभा कर आखिर क्यों नारी ने खुद को अकेला पाया है? जब देवों ने भी नारी का मान स्वीकारा है, आखिर फिर क्यों समाज ने ठुकराया है? ✍उज्ज्वल कुमार
2 years ago