Raj Ashok 04 Aug 2024 कविताएँ समाजिक मुश्किल 38266 0 Hindi :: हिंदी
याद करता हूं । उस पल को खामोशी से बीते कल को न जाने इसमें कितने ख्वाबों की लिखावट है । यह जिंदगी कोई ठहराव नहीं वक्त और तकदीर की बनावट है ।। यहां हर फैसला आने वाले कल को बदल देता हैं ।। मुश्किल से मुश्किल घड़ी में भी हर हल देता है जीवन चलन है । चाहतों का हर दौर बदल देता है। पहले,आग में तपकर देखिए ,जनाब तस्वीरें क्या जीने का,हर लहजा बदल जाएंगा। किसी जरूरत के वक्त जब अपने अजनबी से नजर आएंगे। और तब जिंदगी ,का मकसद बदल जाएगा।।