Jeevan kumar 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद जीवन एक साहित्य 118948 0 Hindi :: हिंदी
छूत - अछूत का पता नहीं ,
न मित्र ने मुझे सिखाया ,
उस दो बूंद - छूत पानी ने ,
मुझे मौत के गले मिलाया ।
मुझे पता नहीं था .................
मुझे पता नहीं था,
पानी मेरी मौत होगा,
न लिखा उस घड़े पर,
मेरी मौत का सौगात ।
!गर जीव हत्या घड़े से होती,
तो न पिता जलपान,
मुझे पता नहीं था...…...............
मुझे पता नहीं था , घड़ा मेरी मौत होगा ।
तुम्हारा घड़ा छूत कहलाता,
हम छूते अछूत हो जाता ,
मुझे पता नहीं था ..........…......
घड़ा तुम्हारा अमृत का झरना,
अमृत पिओ इंसान कहलाता।
मुझे पता नहीं था...................
मुझे पता नहीं था घड़ा मेरी मौत होगा ।
( जीवन)