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मौन हलचल

आकाश अगम 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य #मौन हलचल #hindipoetry #hindikavita #Akashagam 57698 0 Hindi :: हिंदी

तू अगम कोई अनोखा है नहीं इस विश्व भर में
घुट रहा है ,  शीश के नीचे कोई कन्धा नहीं है।।

ईश ने सबको दिया अधिकार जब स्वच्छन्द का तो
कोयलें  सुर  में  भला   तेरी  बता  क्यों  ताल  लेंगीं
है प्रथा : मिस्ठान, धन , फल-फूल अर्पित देवता को
देवियाँ  ये  क्यों तेरी  झोली  में  सिक्का  डाल  देंगीं
लोग अगणित , शीश के ऊपर  दिवाकर तमतमाता
रात्रि  की  है  मौन  हलचल , शीश पर चंदा  नहीं है
तू अगम कोई .......।

तू  जला  सकता  है पूजा की पवित्र  अज्ञारियों  को
जायगा  उड़  वायु  में  ,  कर्पूर   सा   व्यवहार   तेरा
ले रहा पल पल हिलोरें,  है हृदय सागर  समान और
मन  तेरा  इस  भाँति  जैसे  पक्षियों  का   देख  डेरा
इक  तरह  तू  कह  रहा  संसार  के हैं चक्षु फूटे
और कहता है कि मुझ जैसा कोई अन्धा नहीं है
तू अगम कोई .......।

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