अंजली कुमारी 03 Jun 2024 कविताएँ समाजिक 27678 0 Hindi :: हिंदी
मैं हूं अपने शिक्षक की आज्ञाकारी मैं हूं उनकी शिष्टाचारी, उन्होंने ही तो ज्ञान दिया मैं हूं उनकी बहुत आभारी। मैं हूं अपने पापा की प्यारी मैं हूं उनकी बेटी प्यारी, उन्होंने ही तो संघर्ष करना सिखाया मैं हूं उनकी बहुत आभारी। मैं हूं अपने मां की दुलारी मैं हूं उनकी राजकुमारी, उन्होंने ही तो सिखाई जिम्मेदारी मैं हूं उनकी बहुत आभारी। मैं हूं अपने भैया की दुनिया सारी मैं हूं उनकी बहन प्यारी, उन्होंने ही तो लड़ झगड़ कर प्यार करना सिखाया मैं हूं उनकी बहुत आभारी। मैं हूं अपने बहन की प्यारी मैं हूं उसकी बहन संस्कारी, उसने ही तो सिखाया निभाना रिश्तेदारी मैं हूं उसकी बहुत आभारी। मैं हूं अपनी दोस्त की सच्ची यारी मैं हूं उनकी दोस्ती प्यारी, उसने ही तो दोस्ती करना सिखाया मैं हूं उसकी बहुत आभारी ।।