Raj Ashok 21 May 2024 कविताएँ समाजिक मेहनत,लगन ,लक्ष्य 35841 0 Hindi :: हिंदी
ना नजब लिखते हैं। ना गजल लिखते हैं । हम तो अपने वतन की मिट्टी से अपना-अपना नशीब लिखते हैं । हालातो के संघर्ष , जज्बातों की कहानियों से ज्यादा अपना ही दर्द छुपा कर लोगों से यह बताते हैं । कि हम खुश है।। देखो-देखो हमें खुशियों के बहाने नहीं चाहिए हम मिट्टी के खिलौने बना कर दुनिया को खुशियां बेचते हैं । हम इस जमीन पर जमीन की वो जड़ है। जहां प्रकृति खुद महकती है।। न जाने क्यों लोग उलझे हैं । यहां कोई चिराग तब जले जब दीपक मे तेल बाती ओर चिनगारी ये सब आपस में मिले है ,दस्तुर जीवन का ये जब मेहनत,लगन लक्ष्य मिले तब रोशन जीवन होगा।