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मैंने देखा है

Rambriksh Bahadurpuri 15 Jul 2024 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri kavi #Ambedkarnagar poetry # jeevan men Parivartan per kavita # 37724 0 Hindi :: हिंदी

मैंने देखा है 

मैंने देखा है 
ढलते शाम में 
घेरे घने अंधेरों को
छुट पुट बिखरे 
विशाल घने घनेरों को 
लालित्य स्वर्णिम 
रक्त रंजित उदित को 
छिपते 
छिपाते रैन बसेरों को,  
 
मैंने देखा है 
खिलता फूल 
उगता सूर्य 
छिपते अंध 
फैलते गंध
सुबह सवेरे में,
भरा उत्साह 
ढेरों चाह 
चहल-पहल 
चलते हल 
चाहतें प्रेम 
मन के घेरे में। 

रचनाकार 
रामबृक्ष बहादुरपुरी 
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश

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