Sweta Kumari 10 Dec 2024 कविताएँ अन्य मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर 21867 0 Hindi :: हिंदी
मानव के अधिकार का दिवस है ये कहलाता पर क्या मानव को यह उसका अधिकार है दिलाता जात पात की दीवार ने बांट दिए मानव धर्म ने मानव को बना दिया दानव क्या दानवों को खत्म है ये कर पाता मानव के अधिकार का दिवस है ये कहलाता ऊँच नीच के भेद को भुला ना पाया मानव दिल मे छुपे एहसास को समझ न पाया मानव क्या प्यार के बदले मे प्यार है ये दे पाता मानव के अधिकार का दिवस है ये कहलाता दर्द को ना महसूस किया जिसने क्या वो हो सकता है मानव? दूसरे की खुशी में न खुश हुआ क्या हो सकता वो मानव ? क्या मानव के होने का एहसास है ये करवाता मानव के अधिकार का दिवस है ये कहलाता।