Shreyansh kumar jain 22 Aug 2024 कविताएँ देश-प्रेम 50000000 27634 0 Hindi :: हिंदी
मैंने इस दुनिया का इतिहास बदलते देखा है, मैंने इस दुनिया का भूगोल बदलते देखा है, जिसको था ऊंचा-ऊंचा गुमान स्वयं पर, मैंने उन ऊंचो- ऊंचो का गुमान उतरते देखा है, मैंने इस दुनिया का इतिहास बदलते देखा है, मैंने इस दुनिया का भूगोल बदलते देखा है।। मैंने राजाओं को रंक बनते देखा है, मैंने ऊंचे-ऊंचे पर्वतों को स्वयं बिखरते देखा है , मैंने ताकतवरो को कमजोर बनते देखा है, मैंने इस दुनिया का इतिहास बदलते देखा है ।। मैंने लुटते एक मुल्क को इस जीवन में देखा है, हथियारों के दम पर मैंने देश को लुटते देखा है, आतंकवाद को पाला जिसने उसको भीख मांगते देखा है, मैंने इस दुनिया का इतिहास बदलते देखा है, मैंने इस दुनिया का भूगोल बदलते देखा है।। हमने भारत माँ का बेटा दिल्ली पर बिठा कर देखा है, आंखों से आंख मिलाकर मुल्कों को भारत का जवाब देते देखा है, हमने दिल्ली के सिंहासन पर एक शेर बिठाकर रखा है, मैंने इस दुनिया का इतिहास बदलते देखा है ।। श्रैयांश जैन