Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

मैं मिट्टी का दीपक हूं- नील गगन का तेज चमकता ना तपता मैं सूरज हूं

Rambriksh Bahadurpuri 22 Aug 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri #Rambriksh Bahadurpuri kavita #Kavi Rambriksh Bahadurpuri #Ambedkar Nagar poetry #Ambedkar Nagar kaviar 41411 1 5 Hindi :: हिंदी

मैं मिट्टी का दीपक हूं 


नील गगन का तेज चमकता
ना तपता मैं सूरज हूं,
ना शहनशील ना हूं विशाल  
ना धरती का धीरज हूं। 

ऊॅंची ऊॅंची लहरों वाला
नही असीमित नीरधि हूं,
गगन चूमती पर्वतमाला
नही देव की क्षीरधि हूं। 

नहीं क्षितिज सा धरा गगन का
आलिंगन अभिनंदन हूं
नहीं किसी भी तेज भाल पर
शीतलता का चंदन हूं। 

ना मेरा पहचान बड़ा है
ना ज्योतिष ना ज्ञानी हूं,
ना प्रतीक ना चिह्न किसी का
ना मैं प्रेम निशानी हूं। 

हर छोटे मजबूर घरों का
जीवन-आशा-रूपक हूं, 
पड़ा हुआ कोने में जलता
मैं मिट्टी का दीपक हूं। 

       रचनाकार
   रामबृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश

Comments & Reviews

Sudha Chaudhary
Sudha Chaudhary बहुत सुंदर

2 years ago

LikeReply

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: