SHUBHAM PATHAK 30 Jan 2025 कविताएँ समाजिक 19192 0 Hindi :: हिंदी
इतनी बड़ी दुनिया में, जो कुछ भी दृश्यमान है, मुझे नहीं लगता, माँ से अधिक कोई बलवान है! फटे हुए कमीज पर, जो परिवार की ख्वाहिशे पूरी करें, मुझे नहीं लगता पिता से बड़ा, कोई और धनवान है! शक्ति हो या नहीं, मजबूत हो या नहीं, भाई के लिए दुनिया का सामना करें, मुझे नहीं लगता, भाई से बड़ा कोई और बलवान है! तोहफ़े दो या ना दो, कपडे दो या ना दो, ख़ुशी ख़ुशी भाई की कलाई राखी से सजाति हे, मुझे नहीं लगता, बहन से बड़ा कोई और दयावान है! परिस्थिति चाहे जो हो, गरीबी हो या अमीरी हो, खाना हो या ना हो, हर स्थिति मे साथ हो, मुझे नहीं लगता, रिश्तो के लिए पत्नी से ज्यादा कोई ईमानदार है! सबकुछ होने के बाद, हर ख़ुशी होने के बाद भी, अगर बंदा खुश नहीं तो, मुझे नहीं लगता, इस दुनिया मे उससे ज्यादा कोई परेशान हो! इतना सब कुछ एक साथ हो, खुशियाँ उनके परिवार मे हो, मुझे नहीं लगता, इससे ज्यादा भगवान किसी और पर मेहरबान है! ✍️✍️✍️शुभम पाठक ✍️✍️✍️