Arjun yadav dikoli 02 Nov 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत कविता/लेखन/पत्रिका/कहानी/पत्रलेखन/ 8280 0 Hindi :: हिंदी
लो चलने लगी फिर से ये सर्द हवाएं... रजाई से दबा रखा है खुद को, पर तेरी यादो को कैसे दबाएं.... अब तू ही बता तुझे हम कैसे भूल जाए... 2 तुझे याद है इन्ही दिनों मे हम मिले थे, प्यार ना था बस दोस्ती के गुल खिले थे। फिर मौषम भी करबट ली दोस्ती अपनी ये प्यार मे बदली तुम्हे डर था की जमाना खिलाफ ना हो जाए, औरो की तरह हम भी ना कही बदल जाएं.....। फिर भी तुम मेरे प्यार मे बढ़ती चली गयी और ये सर्द हबाये भी बढ़ती चली गयी अब ये साल भी बदलने को था सजकर प्यार का पहला तोपहा मुझे मिलने को था देख कर तुम्हारे तोपहे को अरमान हमने भी कई सजाए. लग रहा था यु की ये मौसम बस यु ही चलता जाएं.....2 फिर ये हसीं मौषम भी बदल गया, तेरा अरमा भी बदल गया। हम और तुम हमेशा के लिए बिछड़ गए, बिछड़.. 2 लो चलने लगी फिर से ये सर्द हवाएं...... रजाई से दबा रखा है खुद को,पर पर तेरी यादो को कैसे दबाए... तू ही बता तुझे हम कैसे भूल जाएं... 2 आप का अपना अर्जुन , अब पता ना हम कभी मिले या ना मिले...... ................................ ×विराम ×...........................