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लक्ष्मी बाई

DIGVIJAY NATH DUBEY 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम दिग्दर्शन 81559 0 Hindi :: हिंदी

धधक उठी जब ज्वाला नभ में 
धूल भरा अंधियारा उपजा 
जब लक्ष्मी बाई का अस्त्र
दुश्मन की सेना को गरजा

शिव का डमरू दमक गया 
सहम उठा इंद्रासन नभ में 
किसने है तलवार चलाई 
धरती के झांसी के तल में 

घबराई अंग्रेज की टोली
कौन है अबला आग लगाई 
भाग सको तो भाग लो साथी
दुर्गा माता सामने आई 

देख के लक्ष्मी की जिज्ञासा 
सेना ने एक लहर जगाई
उठे सभी और बोले स्वर मे 
झांसी की रानी है आई

चलने लगे जब गोले भाले 
रानी की तलवार थी काफी 
कई के गर्दन काट काट के 
रक्त भरी नदिया बहा दी

देख के लाल तलवार की लीला
अंग्रेजो की सांस अटक गई 
देख तेज रानी का चेहरा 
दुश्मन अफरा तफरी मच गई।

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